ज्योतिर्मठ महिमा महोत्सव (आठवाँ दिन) – “अखिल भारतीय वेद सम्मेलन” प्रारम्भ।

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शुक्रवार, 2 जून 2017

प्रेस नोट :

ज्योतिर्मठ महिमा महोत्सव (आठवाँ दिन) – “अखिल भारतीय वेद सम्मेलन” प्रारम्भ।

तोटकाचार्य गुफा, ज्योतिर्मठ, बद्रिकाश्रम, उत्तराखंड में चल रहे महोत्सव में आज 2 जून से त्रिदिवसीय अखिल भारतीय वेद सम्मेलन आरम्भ हो चुका है। ध्यातव्य है कि ” ज्योतिर्मठ महिमा महोत्सव” के अन्तर्गत विगत 26 मई से मठ द्वारा विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं जिसमें कल श्रीमद्भागवत ज्ञानयज्ञ की पूर्णाहुति हुयी।

आज प्रातःकाल ज्योतिर्मठ के 25 स्थानीय ब्राह्मणों के साथ दण्डी स्वामी सदाशिव ब्रह्मेन्द्रानन्द सरस्वती जी ने जगद्गुरु शंकराचार्य (ज्योतिष्पीठ एवं शारदा द्वारका पीठ) पूज्यपाद स्वामी स्वरूपा नन्द सरस्वती जी महाराज का पादुका पूजन कर “अखिल भारतीय वेद सम्मेलन” का शुभारम्भ करने के लिए गुरुआज्ञा प्राप्त किया।

इसी क्रम में पूज्यपाद शंकराचार्य जी ने उतत्तराखंड के 75 विशिष्ट जनों को विभिन्न क्षेत्रों में विशेष योगदान के लिये सम्मानपत्र, वस्त्र, रुद्राक्ष माला इत्यादि तथा एक रूपये प्रतिवर्ष के हिसाब से पचीस सौ रूपये प्रसाद स्वरूप देकर “ज्योतिर्मठ सम्मान” से सम्मानित किया।

तदुपरान्त सम्पूर्ण भारत से आये हुए लगभग 150 वैदिक ब्राह्मणों ने समवेत स्वर में स्वस्तिवाचन एवं गणेशाथर्वशीर्ष एवं देव्यथर्वशीर्ष का पाठ कर क्रमशः चारों वेदों की सभी शाखाओं का मंगलाचरण किया ।

उद्घाटन सत्र में लालबहादुर शास्त्री केन्द्रीय संस्कृत विद्यापीठ, दिल्ली के कुलपति प्रो. रमेश कुमार पाण्डेय ने कहा कि भारत की पहचान भौगोलिक सीमा से नहीं अपितु वैदिक संस्कृति से है जिसकी उद्धारक और रक्षक शंकराचार्य परम्परा है। उद्घाटन सत्र में वाराणसी के प्रो. श्री प्रकाश मिश्र, प्रो. वसिष्ठ त्रिपाठी, प्रो. राम किशोर त्रिपाठी तथा स्वामी अमृतानन्द सरस्वती इत्यादि विद्वानों ने भी सम्मेलन को सम्बोधित किया ।

ज्योतिष्पीठ एवं द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य पूज्यपाद स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वतीजी महाराज ने अपने आशिर्वचन में कहा कि गाय ब्राह्मण और वेद पर ही धरती टिकी हुयी है। प्राणियों की 84 लाख योनियां हैं । उनमें से अन्य प्राणियों और मनुष्य में अन्तर यह है कि अन्य प्राणी केवल पिछले जीवन के कर्मों का फल भोगते हैं, नया कर्म नहीं कर सकते जबकि मनुष्य नये कर्म भी करता है। पूज्यपाद शंकराचार्य जी ने गो , गंगा एवं वेद के संरक्षण पर विशेष बल देते हुए कहा कि चार पुरुषार्थों में से धर्म प्रमुख है। धर्म से ही अन्य तीन पुरुषार्थों अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है – “ऊर्ध्वबाहुर्विरौम्येष न च कश्चिच्छृणोति मे।
धर्मादर्थश्च कामश्च स किमर्थं न सेव्यते।।”
पूज्यपाद शंकराचार्य जी ने वेद सम्मेलन को सफलता का आशिर्वाद देते हुए कहा कि ज्योतिर्मठ देवभूमि हिमालय में स्थित होने के कारण धर्मरक्षा एवं साधना का मुख्य केन्द्र है। यहाँ इस प्रकार का आयोजन होते रहना चाहिए।

चतुर्वेदपारायण एवं अखिल भारतीय वेद सम्मेलन अनवरत तीन दिन तक चलेगा। उसके बाद अथर्ववेदाभिषेक , पाटोत्सव, भण्डारा इत्यादि कार्यक्रम 7 जून तक चलेंगे । विगत वर्ष ज्योष्पीठ की स्थापना के 2500 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ज्योतिष्पीठ के वेद अथर्ववेद एवं शंकरभगवत्पाद की सभी रचनाओं का अखण्ड पारायण किया गया था।

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