भगवान ने सृष्टि की रचना क्यों की ? – डॉ एच एस रावत, हिंदू धर्म उपदेशक

भगवान ने सृष्टि की रचना क्यों की ? – डॉ एच एस रावत, हिंदू धर्म उपदेशक

भगवान का विशेष कार्य क्या है ? भगवान ने सृष्टि की रचना क्यों की ? भगवान प्रलय क्यों करता है ?

भगवान के मुख्यत 4 काम होते हैं ।
1- सृष्टि की रचना करना
2- सृष्टि का प्रलय करना
3- जीव आत्माओं को पाप पुण्य का फल देना
4- संसार का पालन करना ।

1- भगवान सृष्टि की रचना क्यों करता है ?

आप कल्पना करें कि यह संसार न होता तो क्या होता ? सब कुछ शून्य होता । और शून्य में कोई भी जीवआत्मा परमात्मा निवास नहीं कर सकता है । इसलिए भगवान ने अपने ज्ञान और प्रयत्न के सहारे इस सृष्टि की रचना की है ताकि वो इस सृष्टि का आनंद ले सके । भगवान के लिए सृष्टि सृजन व प्रलय एक प्रकार से खेल है । जो आत्मा इस खेल में विजय को प्राप्त करती है वही आत्मा भगवान के नजदीक पहुँच जाती है ।
यही विचार 84 लाख योनियों में भगवान ने नियुक्त कर दिया । जैसे माता बच्चा पैदा करती है और उसका आनंद लेती है तथा गलती पर सजा भी देती है ।

2- सृष्टि का प्रलय क्यों करता है भगवान ?

जब कोई भी चीज़ बहुत लंबे समय तक चलायमान रहती है तो उसका ह्रास होता है । उस ह्रास को दुबारा ठीक और तरोताजा करने के लिए पुनः सृष्टि की उत्पत्ति की जाती है । जैसे पेड़ के पत्ते सुख जाते हैं और कुछ समय बाद पुनः हरे हो जाते हैं । यह चक्र चलता रहता है । यह चक्र ताश के पत्तों की तरह होता है । जैसे ताश खेलते हुए ताश के पत्तों को फैला दिया जाता है , फिर बांट दिया जाता है । फिर खिलाड़ी खेलता है , बहुत समय तक तनाव में रहता है , दिमाग लगता है और हार जीत हो जाती है और सारे पत्ते एक डिब्बी में इकठ्ठे हो जाते हैं । इसी प्रकार सभी आत्माएं अपने-अपने कर्म करने के बाद प्रलयकाल में भगवान की नाभि में एकत्र हो जाती हैं ।

3- जीव आत्माओं को पाप-पुण्य का फल देना –

जैसे माता पिता अपने बच्चे का लेखा-जोखा रखता है और मालिक अपने कर्मचारी का लेखा-जोखा रखता है तथा उसी के आधार पर उन्नति और प्रगति होती है । ऐसे ही भगवान भी सबके पाप-पुण्य और कर्म का लेखा-जोखा रखता है । उसी आधार पर हमें योनियाँ प्राप्त होती हैं । तथा भगवान के भय के कारण हम पाप कर्म से दूर रहते हैं । क्योंकि इस सृष्टि के रचने के सिद्धान्त को सिर्फ भगवान ही जानता है ।

4- संसार का पालन भगवान क्यों करता है ?

यह भगवान का ही सिद्धान्त है कि जो जिस चीज़ का निर्माण करेगा वो उस चीज़ का रख रखाव भी करेगा । इसलिए भगवान ने इस सृष्टि को रचा है तो इसके पालन की ज़िम्मेदारी भी भगवान की है ।
इसलिए भगवान की सृष्टि की रचना ही परम सत्य है । इसका भावार्थ अलग-अलग ऋषियों ने अलग-अलग रूप में कर दिया है । इसलिए सभी योनियों में संकट के समय भगवान को याद करने की परंपरा है । भगवान द्वारा रचित इस खेल में जो आत्मा विजेता होती है वही मोक्ष को प्राप्त होती है और भगवान के पास पहुँच जाती है ।

डॉ एच एस रावत
(हिन्दू धर्म उपदेशक)