
उन्हें पीटना भी गलत है तो उनका सम्मान भी उचित नहीं, मुद्दे पर राजनीति न हो
‘परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिणीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामीत्रीः अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती 1008 जी माहाराज ने कहा है कि सनातन धर्म को जितनी भी जातियां ही किसी भी वाति में जन्म लेना गौरव की बात है। भगवान सबके है। भगवान की कथा कहने-सुनने का अधिकार भी सबकी है, लेकिन जब सार्वजनिक रूप से कोई कया होती है तो उसमें ब्राह्मण व्यासपीठ पर बैठा है ताकि हर वर्ष के लोग उसे सुन सकें, कोई करें।
इटावा में जो कुछ हुआ, यह बहुत गलत हुआ है। उसमें दोनों ही पक्ष हमारी दुशि से समान रूप से दोषी हैं, लेकिन घटना के बाद जिससे उसका राजनीतिक उपयोग किया जा रहा है, यह और भी गलत है। दो पक्ष के लोग यहले ही दोषी अब तीसरे उनका सम्मान करने वाले, वे भी दोषी है।
महाराजश्री ने कहा किस बात का सम्मानको लोग अपनी जाति यूषा का वहां गए। ऐसा वहां के लोग कह यो हैं। कति छुपाकर जाना चोखा देना है तो चोखा देने वाले का सम्मान कैसे बनता है। आप उनको सांवना दे सकते हैं कि भाई आपके साथ जो मारपीट हुई है या ठीक नाहीं है, लेकिन सम्मान जलग वस्तु होती है। मारपीड नहीं करनी चाहिए थी, जिन लोगों ने मारपीट की बिल्कुल गलत किया। क्लिको मारा गया उनके जी किसी को भी सहानुभूति हो सकती है, अगर अखिलेश यादव को सधनुभूति है तो हमें भी है, इसलिए हम उसको गला नहीं कहेंगे, लेकिन उनका शांति मोदाकर सम्मान करना भी उचित नहीं है। यह ज्यादा है, क्योंकि उन्होंने भी दोष किया है, गलती उनकी भी है। उनको अपनी जाति नहीं छुयानी पाहिए थी।
महाराजश्री ने कहा, सनातन धर्म की जितनी भी वातियां हैं किसी भी बात में सौरव की बात है, क्योंकि भगवान द्वारा यार वर्ष जो बनाए गाए हैं वह सीधे भगवान की रचना है। उन्हीं के अंगों से उनकी कापना की गई है, इसलिए हम जब एक ही परमात्मा के अंग हैं तो हमें इस बात का गौरव होना चाहिए।
महाराजश्री ने कहा कथा तो भगवान की सबके लिए है। भगवान भी सबके लिए हैं। हर व्यक्ति अपने-अपने या में भगवान को बुता है। सबके घर में भगवान जाते हैं। देखिए, जिसके यर में सोने का सिंहासन है यो भी भगवान को बुलाता है। भान उसके घर में भी बाहे हैं और जिसके पर में जगह ही नहीं है दीवार में जाला लगाकर, उसी आले में लाकर भगवान को बिठा देता है तो अनंत बहवोड नायक भगवान उसी आगे में आक्त बैस जाते हैं. इसलिए भगवान की तो कोई बात ही नहीं है। भगवान की कथा कहने का सुनने का भी अधिकार सभी की है. लेकिन हमारे यहां कुछ मर्यादाएं भी बनाई गई हैं। उस मर्यादानों में यह है कि जब सार्वजनिक रूप से कोई कथा होती है तो उसमें ब्राहाणा व्यास आसन पर बैड़ता है ताकि हर वर्ग के लोग उसे सुन सकें।
‘पहले वे बौद्ध कथा कह रहे थे, अचानक मानस बदला अपनी ही जाति में खुश रहना सीखें, उस पर गौरव करें’
महाराजश्री ने कहा, वे लोग पहले बौद्ध कथा कह रहे थे। अब रामजी व कृष्णजी की कथा कहने लगे फिर उन्होंने कल्पना कर जाति बदल ली और उस जाति के अनुसार कागज बनवा लिए। और उसी अनुसार अपना नाम लिखने लग गए। इससे पता चलता है कि वे जो व्यक्ति हैं वे जिस जाति के हैं उस जाति में अपना गौरव महसूस नहीं कर रहे हैं, इसीलिए वे अपने आरोपित जाति एक-दूसरी जाति बना करके आए हुए हैं। उनको ऐसा नहीं करना चाहिए। जिस जाति में जन्म हो गया उस जाति में एक से एक महापुरुष हुए होंगे। अपनी जाति के महापुरुषों का आदर्श ध्यान में रखते हुए उनको अपनी जाति पर गौरव रखना चाहिए और उस जाति को किसी से भी कम नहीं समझना चाहिए।
जानिए, क्या है मामला
इसलिए हो रही है इस पर राजनीति बचाव में उतरे अखिलेश यादव
बता दें कि बीती 24 जून को यूपी के इटावा जिले में ब्राह्मण न होने की जानकारी पर महेवा के दांदरपुर गांव में शनिवार रात ग्रामीणों ने भगवताचार्य मुकट मणी (मुक्त सिंह) व उनके सहयोगियों को पीट दिया था। ग्रामीणों ने भगवताचार्य का सिर मुड़वाकर चोटी काट दी। नाक रगड़वाकर, गांव के लोगों के पैर छुआकर माफी मंगवाई। बाइक की हवा निकालकर दोबारा पंप से हवा भरवाई। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद खलबली मच गई। जानकारी के मुताबिक शनिवार को दांदरपुर गांव में ग्रामीणों ने श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन कराया था। इसमें भगवताचार्य मुकट मणी (मुक्त सिंह) निवासी गांव थाना सिविल लाइन को व्यास के रूप में बुलाया गया था। इनके साथ दो अन्य सहयोगी संत सिंह यादव निवासी कानपुर देहात और श्याम सिंह कठेरिया निवासी अछल्दा आए थे।
भगवताचार्य के पास दो आधार कार्ड, दोनों में नाम और पता अलग
अभद्रता के शिकार हुए भगवताचार्य के पास दो अलग-अलग आधार कार्ड मिले हैं। एक आधार कार्ड पर मुकट मणी अग्निहोत्री लिखा हुआ है। इसमें पता ब्लॉक चौराहा, महेवा रोड अछल्दा औरैया लिखा है। एसएसपी से मिलने पहुंचे मुकट मणी ने अपना एक और आधार कार्ड पत्रकारों को दिखाया। इसमें उसका नाम मुक्त सिंह निवासी गांव नग्ला मोतीराम, पोस्ट निवाड़ीकलां, कुशगंवा अहिरन इटावा लिखा हुआ है।
अखिलेश बोले, तीन दिन में कड़ी कार्रवाई न हुई तो आंदोलन
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक्स पर ट्वीट में कहा कि इटावा के बकेवर इलाके के दांदरपुर गांव में भागवत कथा के दौरान कथावाचक और उनके सहायकों की जाति पूछी गई। पीडीए की एक जाति बताने पर, कुछ वर्चस्ववादी और प्रभुत्ववादी लोगों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार करते हुए बाल कटवाए। हमारा संविधान जातिगत भेदभाव की अनुमति नहीं देता है। सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी हो।
