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गिरिजा टिक्कू, आयु:28-30 वर्ष, हत्या का दिन- 25.6.1990
गिरिजा ने बड़ते हुए आतंकवाद और हिन्दू अल्पसंख्यकों पर हो रहे आक्रमणों के कारण कश्मीर घाटी को छोड दिया था। वह जम्मू में थी जब किसी ने उन्हे बताया कि वह बांदीपुरा से अपनी मासिक आय ले सकती हैं जहां वे घाटी छोडने से पहले एक विद्यालय में काम करती थी। उन्हे विश्वास दिलाया गया था कि उन्हे कोई हानि नहीं होगी क्योंकि घाटी में वातावरण सामान्य होता जा रहा था। वे जम्मू की ओर बड़ चली और वहाँ से बांदीपुरा, उत्तर कश्मीर की ओर। फिर वह कभी वापिस नहीं आयी। 25 जून 1990 को एक सड़क के किनारे उनका शरीर दो टुकड़ों में कटा हुआ मिला। उनके शरीर की समीक्षा से पता चला कि पहले उनका बलात्कार हुआ था फिर उनके शरीर को किसी मशीनी आरी नहीं अपितु बड़ई की आरी से दो टुकड़ों में काट दिया गया था। ये पीड़ा अकल्पनीय है। आश्चर्य है कि यह कार्य उन लोगों के द्वारा किया गया था जो अपने को स्वतन्त्रता के कार्यकर्ता कहते थे। और वह भी उन हिंदुओं के साथ जो स्वयं कश्मीरी थे और कश्मीर के बराबर के भागीदार थे।
स्त्रोत-iKashmir.net