(तो ये हश्र किया कश्मीरी मुस्लिम जिहादीयों ने एक ऐसे महाविद्वान का जिन्होने श्रीभागवत गीता का कश्मीरी में अनुवाद किया था, कश्मीरियत से जुड़े रहे और अपने गाँव के सभी पड़े लिखे मुसलमानो को पड़ाया जिनके भरोसे ही वे अपना गाँव छोड़ कर नहीं गए थे। ऐसी वीभत्स निर्दयता और रक्तरंजित सोच केवल आसुरी प्रवृत्ति वालों में ही होती है-हिन्दू जागरण अभियान के संयोजक जितेंद्र खुराना की टिप्पणी)

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