श्री पीतांबरा पीठ, दतिया – शत्रु-नाशिनी और राजसत्ता की देवी
मध्यप्रदेश के दतिया जिले में स्थित श्री पीतांबरा पीठ माँ बगलामुखी का सिद्धपीठ है। इसकी स्थापना 1935 में हुई थी। यहाँ माँ के दर्शन एक छोटी सी खिड़की से होते हैं। इन्हें पीतांबरा इसलिए कहा जाता है क्योंकि इन्हें पीला रंग अत्यंत प्रिय है, और यह पीत वस्त्र धारण करती हैं।
पूजन विधि
1. शुद्धता और वस्त्र: ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें। पूजा के लिए पीले आसन पर बैठें।
2. सामग्री: माँ को पीले फूल, पीला चंदन, हल्दी की माला, पीली सरसों और सुगंध अर्पित करें।
3. भोग: मान्यता है कि बेसन के लड्डू, हल्दी, दही और केसर मिश्रित दूध का भोग और 108 हल्दी की गांठ की माला अर्पित करने से माँ शीघ्र प्रसन्न होती हैं।
4. मंत्र जाप: एकाग्र मन से “ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा” मंत्र का हल्दी की माला से जप करें। पूजन से मिलने वाले लाभ
माँ पीतांबरा को शत्रु नाश की देवी माना जाता है।
शास्त्रों के अनुसार उनकी उपासना से –
• शत्रु बाधा और कोर्ट-कचहरी में विजय: विरोधियों की शक्ति क्षीण होती है और कानूनी मामलों में सफलता मिलती है।
• राजसत्ता, यश और ऐश्वर्य: इसीलिए चुनाव से पहले बड़े-बड़े राजनेता यहाँ अनुष्ठान कराते हैं।
• मानसिक लाभ: भय का नाश, आत्मविश्वास में वृद्धि, बुद्धि का विकास और मन को शांति व स्थिरता प्राप्त होती है।

पं गगन महाराज जी (मां पीतांबरा साधक)
दतिया मध्यप्रदेश
7000106107
जय माई की
Note – उपरोक्त विचार लेखक पंडित गगन महाराज के हैं। अनुष्ठानों के परिणाम मां पिताबरा की इच्छा पर निर्भर हैं। Hindumanifesto.com मात्र प्रस्तुतिकरण का मंच है, हमारा पाठकों के अनुष्ठानों से कोई संबंध नहीं।